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Monday, 9 November 2015

ना पुछ मेरे सबर् कि हद् कहाँ तक है। 
कर के सितम देख ले ज़ालिम तेरी ताकत जहाँ तक है।
कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां 
ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला...!
“कोई तो कर रहा है मेरी कमी पूरी..., 
तभी तो तुझे मेरी याद अब नहीं आती..!”
छोटा बनके रहोगें तो, मिलेगी हर बड़ी रहमत दोस्तों
बड़ा होने पर तो माँ भी, गोद से उतार देती है……..!!

फ़रिश्ते ही होंगे जिनका हुआ “इश्क” मुकम्मल,
इंसानों को तो हमने सिर्फ बर्बाद होते देखा है….!!

Saturday, 7 November 2015

हम तुम्हें मुफ़्त में जो मिले हैं,
 क़दर ना करना हक़ है तुम्हारा..
रिश्ते खराब होने की एक वजह ये भी है,
कि लोग झुकना पसंद नहीं करते…!!
तुमने समझा ही नहींऔर ना समझना चाहा,
  हम चाहते ही क्या थे तुमसे… “तुम्हारे सिवा”.

लूट लेते हैं अपने ही, 
वरना गैरों को क्या पता इस दिल की दीवार कमजोर कहाँ से है !

उसने पुछा जिंदगी किसने बरबाद की,
हमने ऊँगली उठाई और अपने ही दिल पर रख ली |

क्यूँ शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर ,
हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा हैं…
तेरी तलाश में निकलू भी तो क्या फायदा..
तुम बदल गए हो.. खो गए होते तो और बात थी|


मेरी लिखी किताब, मेरे ही हाथो मे देकर वो कहने लगे
इसे पढा करो, मोहब्बत करना सिख जाओगे..!!



ना छेड़ किस्सा वोह उल्फत का बड़ी लम्बी कहानी है,
मैं जिन्दगी से नहीं हारा किसी अपने की मेहरबानी है|

ना पीछे मुड़ के देखो, ना आवाज़ दो मुझको,
बड़ी मुश्किल से सीखा है मैंने अलविदा कहना..!

मुहब्बत में झुकना कोई अजीब बात नही..
चमकता सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए।

तेरी तो फितरत थी सबसे मोहब्बत करने की,
हम तो बेवजह खुद को खुशनसीब समझने लगे|

जहर से खतरनाक है यह मोहब्बत,
जरा सा कोई चख ले तो मर मर के जीता है!

आज़ाद कर दूंगा तुमको अपनी मुहब्बत की क़ैद से,
करे जो हमसे बेहतर तुम्हारी क़दर पहले वो शख्स तो ढूँढो..

जिनका मिलना मुकद्दर मे लिखा नही होता..
उनसे मुहबत कसम से कमाल की होती है ।।

अब जो रूठोगे तोह हार जाउंगी..
मनाने का हुनर भूल चुकी हु|

चलो उसका नही तो खुदा का एहसान लेते हैं…
वो मिन्नत से ना माना तो मन्नत से मांग लेते हैं..

कभी टूटा नहीं दिल से तेरी याद का रिश्ता,
गुफ्तगू हो न हो ख्याल तेरा ही रहता है..

उन्होंने वक़्त समझकर गुज़ार दिया हमको..
और हम.. उनको ज़िन्दगी समझकर आज भी जी रहे हैं..!!

अगर तुम समझ पाते मेरी चाहत की इन्तहा
तो हम तुमसे नही तुम हमसे मोहब्बत करते

झूठ बोलने का रियाज़ करता हूँ सुबह और शाम मैं
सच बोलने की अदा ने हमसे कई अजीज़ यार छीन लिये|

बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना,
कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में !

बड़े शौक से बनाया तुमने मेरे दिल मे अपना घर….
जब रहने की बारी आई तो तुमने ठिकाना बदल दिया|

बहुत देता है तू उसकी गवाहियाँ और उसकी सफाईयाँ..
समझ नहीं आता तू मेरा दिल है या उसका वकील..!!

झूठ कहते हैं लोग कि मोहब्बत सब कुछ छीन लेती है,
मैंने तो मोहब्बत करके, ग़म का खजाना पा लिया|