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Saturday, 16 January 2016


वो खुद पर गरूर करते है, तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं,
जिन्हें हम चाहते है, वो आम हो ही नहीं सकते 

खुद पर भरोसा करने का हुनर सीख लो ! 
सहारे िकतने भी सच्चे हो एक दिन साथ छोड़ ही जाते हैं ।

सिर्फ तूने ही कभी मुझको अपना न समझा ,
जमाना तो आज भी मुझे तेरा दीवाना कहता है.!!
ला तेरे पैरों पर मरहम लगा दूं...
मेरे दिल पर ठोकर मारने से इनकाे चोट तो आई होगी.

गुजर गया वो वक़्त जब तेरी हसरत थी मुझे..!!
अब तू खुदा भी बन जाय तो भी तेरा सज़दा न करूँ..!!

सोचा था छुपा लेंगे गम अपना..। 
कमबख्त आंखों ने ही बगावत कर दी..।।
खुद को मेरे दिल में ही छोड़ गए हो...
आपको तो ठीक से बिछड़ना भी नहीं आता...!!!
"" दूरियाँ जब बढ़ी तो गलतफहमियां भी बढ़ गयी,
फिर तुमने वो भी सुना,, जो मैंने कहा ही नही,,!!

मजबूर नही करेंगे तुझे वादे निभानें के लिए,
बस एक बार आ जा , अपनी यादें वापस ले जाने के लिए . . !!

तेरी यादो ने कोई जवाब ही नहीं दिया
हम बेवजह अश्को से फरियाद करते रहे

वो दिन जो गुजरे तुम्हारे साथ,.
काश जिंदगी भी उतनी ही होती !

उसने मेरा हाथ थामा था उस पार जाने के लिए...
और मेरी एक तमन्ना थी कभी किनारा ना आए..

वजह की तलाश न तब थी न अब है,.
तुझे बेवजह याद करना आदत है मेरी

मतलब का वजन बहुत ज्यादा होता हे..
तभी तो मतलब निकलते ही रिश्ते हलके हो जाते हेे.....

अगर कुछ सीखना है तो आंखों को पढ़ना सीख लो??
वरना लफ्जों के मतलब तो हजारों निकलते हैं!!!
महक कैसे ना आए मेरी बातों से यारो,,
मैनें बरसों से एक ही फूल को मोहबत की है!!!!

मैने खुदा से पुछा कि क्यूँ तू हर बार छीन लेता है “मेरी हर पसंद
”वो हंस कर बोला “मुझे भी पसंद है, तेरी हर पसंद.

ये जमीन की फ़ितरत है की हर चीज को सोख लेती है..
वर्ना इन आँखों से गिरनेवाले आंसुऔ का एक अलग समंदर होता..

दो शब्दो मे सिमटी है मेरी मोहब्बत की दास्तान,
उसे टूट कर चाहा और चाह कर टूट गये..

अगर वो किसी और का होता है तो हो जाने दो।
इतना चाहने के बाद जो हमारा ना हुआ वो किसी और का क्या होगा।

तुम्हें कहने को अलफाज तो सारे चुन लिए थे मैंने 
मगर तुम्हारी खामोशी ने उन्हें होंठों तक आने नहीं दिया